खान-पान संबंधी विकार सिर्फ खाने की आदतों से जुड़ी समस्या नहीं हैं, बल्कि ये गंभीर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य स्थितियां हैं। इन्हें …

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Psychiatric Doctor in Ranchi: Dr. Keshav Jee – Best Psychiatrist in Ranchiउदासी एक सामान्य मानवीय भावना है, जो किसी नुकसान या निराशा के …

Best Psychiatrist in ranchi

Add Your Heading Text Here Psychiatrist in Ranchi: Dr. Keshav Jee – Best Psychiatrist in Ranchiऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लक्षणों को …

Awareness Updates

Best #psychiatrist in Ranchi क्या आपके सिर का आधा हिस्सा तेज दर्द से फट रहा है? 😣 जानिए कहीं यह सामान्य सिरदर्द नहीं, बल्कि #Migraine (माइग्रेन) तो नहीं? सिर में दर्द होना एक आम बात है, जिसे अक्सर लोग चाय पीकर या कोई भी पेनकिलर (Painkiller) खाकर टाल देते हैं। लेकिन अगर यह दर्द सिर के एक हिस्से में बार-बार होता है, असहनीय होता है, और इसके साथ उल्टी या चक्कर आने जैसा महसूस होता है, तो इसे हल्के में न लें। यह Migraine (माइग्रेन) हो सकता है। माइग्रेन केवल एक सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति (Neurological Condition) है जिसके ट्रिगर्स और इलाज सामान्य दर्द से बिल्कुल अलग होते हैं। माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में मुख्य अंतर: माइग्रेन (Migraine): आमतौर पर सिर के एक तरफ (आधे हिस्से) में टीस मारने वाला (#Throbbing) तेज दर्द होता है। इसमें तेज रोशनी, तेज आवाज या तेज गंध से तकलीफ बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। यह दर्द कुछ घंटों से लेकर 2-3 दिनों तक रह सकता है। सामान्य सिरदर्द (Tension Headache): यह पूरे सिर में एक दबाव या जकड़न जैसा महसूस होता है। यह आमतौर पर शारीरिक थकान, कम सोने या गैस की वजह से होता है और आराम करने या सामान्य दवा से ठीक हो जाता है। माइग्रेन के अन्य लक्षण: दर्द शुरू होने से पहले आंखों के सामने धुंधलापन या चमकीली रोशनी दिखना (Aura)। जी मिचलाना, उल्टी होना या अत्यधिक कमजोरी महसूस होना। बार-बार पेनकिलर खाना है खतरनाक: अक्सर लोग माइग्रेन होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स खाते रहते हैं, जिससे किडनी पर बुरा असर पड़ता है और बाद में सिरदर्द और गंभीर हो जाता है। माइग्रेन का सटीक और सुरक्षित इलाज पूरी तरह संभव है। सही #न्यूरोसाइकिएट्रिक परामर्श लें और इस असहनीय दर्द से राहत पाएं। 🩺 डॉ. केशव जी (Best Neuro Psychiatrist in Ranchi) 📍 पता: अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची (Ajmera Tower, Bariatu Road, Ranchi) 📞 अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: 7004702539 🌐 वेबसाइट: www.keshavjee.in #MigraineAwareness #HeadacheVsMigraine #NeurologyHealth #DrKeshavJee #BestPsychiatristInRanchi #NeuroPsychiatristNearMe #RanchiClinic #MigraineTrigger #MentalHealthMatters #BariatuRoad #PainRelief

आप सभी को रथ यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई🙏

Dr. Keshav Jee - Best Psychiatrist in Ranchi क्या मोबाइल छीनने पर आपका बच्चा भी गुस्सा करने लगता है? 📱😭 जानिए Child Screen Addiction के लक्षण और इसे दूर करने के तरीके। आजकल बच्चों को बहलाने, खाना खिलाने या व्यस्त रखने के लिए उनके हाथ में स्मार्टफोन थमा देना एक आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्क्रीन टाइम धीरे-धीरे एक गंभीर मानसिक लत में बदल रहा है? लगातार मोबाइल, टैबलेट या टीवी की स्क्रीन पर व्यस्त रहने से बच्चों के कोमल मस्तिष्क का विकास प्रभावित होता है, जिससे उनके व्यवहार में गंभीर बदलाव आने लगते हैं। स्क्रीन एडिक्शन के मुख्य लक्षण: अत्यधिक चिड़चिड़ापन: मोबाइल या स्क्रीन बंद करते ही बच्चे का हिंसक हो जाना, रोना या चीजें फेंकना। पढ़ाई और बाहरी खेलों से दूरी: किताबों में मन न लगना और दोस्तों के साथ बाहर जाकर खेलने में कोई दिलचस्पी न दिखाना। नींद और व्यवहार में गड़बड़ी: देर रात तक जागना, आँखों में सूखापन, और बात-बात पर जिद या गुस्सा करना। अकेले रहने की आदत: परिवार के साथ बैठने के बजाय अकेले कोने में बैठकर फोन देखना पसंद करना। #माता-पिता के लिए कुछ ज़रूरी कदम: स्क्रीन-फ्री नियम: खाना खाते समय और सोने से 2 घंटे पहले घर में किसी भी स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) का उपयोग पूरी तरह बंद करें। विकल्प दें: बच्चों को रचनात्मक कार्यों जैसे—ड्राइंग, पहेलियां, इंडोर गेम्स या बाहरी खेलों के लिए प्रोत्साहित करें। खुद उदाहरण बनें: बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं। बच्चों के सामने खुद भी मोबाइल का सीमित उपयोग करें। अगर आपका बच्चा स्क्रीन के बिना बिल्कुल नहीं रह पा रहा है और उसका स्वभाव लगातार उग्र या उदास होता जा रहा है, तो इसे केवल 'बचपना' न समझें। सही समय पर चाइल्ड साइकिएट्रिस्ट/विशेषज्ञ की सलाह लें। 🩺 डॉ. केशव जी (Best Neuro Psychiatrist in Ranchi) 📍 पता: अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची (Ajmera Tower, Bariatu Road, Ranchi) 📞 अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: 7004702539 🌐 वेबसाइट: www.keshavjee.in #ScreenAddiction #ChildMentalHealth #ParentingTips #DigitalDetoxForKids #DrKeshavJee #BestPsychiatristInRanchi #NeuroPsychiatristNearMe #RanchiClinic #ChildPsychiatry #BariatuRoad #HealthyChildhood #ScreenTime

क्या घर के बुजुर्ग छोटी-छोटी बातें भूलने लगे हैं या उनका स्वभाव बदल रहा है? 🧓 इसे केवल 'बुढ़ापे का असर' कहकर नजरअंदाज न करें, यह #Dementia हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों का थोड़ा धीमा होना सामान्य है, लेकिन अगर वे अपनी चाबी रखकर भूल जाएं, जाने-पहचाने रास्ते भूलने लगें, या अपनों के नाम याद रखने में उन्हें कठिनाई होने लगे, तो यह सामान्य बुढ़ापा नहीं है। यह Dementia (मनोभ्रंश) या Alzheimer's (अल्जाइमर) जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अक्सर लोग इसे "बुढ़ापे का सठियाना" या "चिड़चिड़ापन" कहकर छोड़ देते हैं, जिससे बुजुर्गों की मानसिक तकलीफ और बढ़ जाती है। सही समय पर लक्षणों को पहचानना बेहद ज़रूरी है। मुख्य लक्षण जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है: हाल की बातें भूलना: पुरानी बातें अच्छे से याद रहना, लेकिन हाल ही में हुई बातचीत या घटनाओं को तुरंत भूल जाना। स्वभाव और व्यवहार में बदलाव: अचानक बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, शक करना, या डिप्रेशन और उदासी में चले जाना। दैनिक कार्यों में कठिनाई: पैसे गिनने, हिसाब रखने या अपने ही घर के कमरों को पहचानने में भ्रम (Confusion) होना। बातचीत में समस्या: बोलते-बोलते सही शब्दों को भूल जाना या एक ही बात को बार-बार दोहराना। उन्हें आपकी ज़रूरत है: डिमेंशिया का कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन सही न्यूरो-साइकिएट्रिक परामर्श, थेरेपी और परिवार के प्यार व देखभाल से बीमारी के बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है। उनके चिड़चिड़ेपन पर गुस्सा करने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य को समझें। 🩺 डॉ. केशव जी (Best Neuro Psychiatrist in Ranchi) 📍 पता: अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची (Ajmera Tower, Bariatu Road, Ranchi) 📞 अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: 7004702539 🌐 वेबसाइट: www.keshavjee.in #DementiaAwareness #AlzheimersIndia #ElderlyMentalHealth #GeriatricCare #DrKeshavJee #BestPsychiatristInRanchi #NeuroPsychiatristNearMe #RanchiClinic #MentalHealthForSeniors #BariatuRoad #MemoryLoss #HealthyAging

National Doctors Day के शुभ अवसर पर विभिन्न समाचार पत्रों में डॉक्टर केशव जी का गरिमामय में उपस्थिति । #NationalDoctorsDay #DrKeshavJee #psychiatrist

क्या सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले आपका हाथ भी मोबाइल पर जाता है? 📱 जानिए कैसे Social Media Addiction आपकी मानसिक शांति छीन रहा है। 'बस 5 मिनट रील्स देख लेता हूँ'—यह कहकर मोबाइल उठाना और फिर कब 2 घंटे बीत जाते हैं, हमें खुद पता नहीं चलता। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट की लत एक गंभीर मानसिक समस्या बनती जा रही है। लगातार लाइक्स, कमेंट्स और नोटिफिकेशन चेक करने की यह चाहत हमारे दिमाग के 'डोपामाइन' (Dopamine) केमिकल को प्रभावित करती है, जो धीरे-धीरे हमें चिड़चिड़ा और अशांत बना देती है। इंटरनेट और सोशल मीडिया लत के मानसिक नुकसान: फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO): दूसरों की 'परफेक्ट' जिंदगी देखकर अपनी जिंदगी से असंतुष्ट होना और लगातार तुलना करना। एकाग्रता (Focus) में भारी कमी: किसी भी काम या पढ़ाई में लंबे समय तक ध्यान न लगा पाना। अकेलापन और एंग्जायटी: वर्चुअल दुनिया में डूबे रहने के कारण वास्तविक रिश्तों से दूरी और अकेलापन बढ़ना। नींद का चक्र बिगड़ना: देर रात तक स्क्रीन देखने से निकलने वाली ब्लू-लाइट के कारण अनिद्रा (Insomnia) की समस्या होना। डिजिटल डिटॉक्स (Digital Detox) कैसे करें? स्क्रीन-फ्री टाइम: सुबह उठने के पहले 1 घंटे और रात को सोने के 1 घंटे पहले मोबाइल को खुद से दूर रखें। नोटिफिकेशन बंद करें: सोशल मीडिया ऐप्स के अनचाहे नोटिफिकेशन्स को ऑफ करके रखें। वास्तविक दुनिया से जुड़ें: परिवार के साथ वक्त बिताएं, किताबें पढ़ें या कोई आउटडोर हॉबी अपनाएं। स्मार्टफोन को अपने जीवन को आसान बनाने के लिए इस्तेमाल करें, खुद को उसका गुलाम न बनने दें। अगर यह लत आपकी दैनिक लाइफ और मानसिक शांति को पूरी तरह प्रभावित कर रही है, तो संकोच न करें, विशेषज्ञ से परामर्श लें। 🩺 डॉ. केशव जी (Best Neuro Psychiatrist in Ranchi) 📍 पता: अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची (Ajmera Tower, Bariatu Road, Ranchi) 📞 अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: 7004702539 🌐 वेबसाइट: www.keshavjee.in #SocialMediaAddiction #DigitalDetox #ScreenTimeManagement #MentalHealthAwareness #DrKeshavJee #BestPsychiatristInRanchi #NeuroPsychiatristNearMe #RanchiClinic #AnxietySupport #BariatuRoad #DigitalWellbeing #FOMO

आप सभी को विश्व योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। योग करें एवं निरोग रहे।

डिलीवरी के बाद नई माताओं में मूड स्विंग्स और उदासी? 🤱 यह सिर्फ 'नॉर्मल थकान' नहीं, #PostpartumDepression हो सकता है। एक बच्चे को जन्म देना किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत अहसास होता है, लेकिन इसके साथ ही महिला के शरीर और दिमाग में बड़े हार्मोनल बदलाव भी आते हैं। अक्सर डिलीवरी के बाद नई माताओं को चिड़चिड़ापन, बिना वजह रोना, बच्चे से जुड़ाव महसूस न होना या हर समय गहरी उदासी और कमजोरी महसूस होती है। हमारे समाज में इसे अक्सर "कमजोरी" या "नई जिम्मेदारी का डर" कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन यह Postpartum Depression (प्रसवोत्तर अवसाद) के लक्षण हो सकते हैं। मुख्य लक्षण जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है: अचानक बहुत ज्यादा रोना आना या गहरी उदासी। अपने ही बच्चे की देखभाल करने में घबराहट या मन न लगना। गंभीर थकान होने के बावजूद नींद न आना (#Insomnia)। खुद को एक असफल माँ समझना या मन में नकारात्मक विचार आना। याद रखें: यह किसी महिला की कमजोरी नहीं है। यह एक मेडिकल स्थिति है जिसे सही काउंसलिंग और डॉक्टरी सलाह से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। एक स्वस्थ माँ ही एक स्वस्थ बच्चे की परवरिश कर सकती है। 🩺 डॉ. केशव जी (Best Neuro Psychiatrist in Ranchi) 📍 पता: अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची (Ajmera Tower, Bariatu Road, Ranchi) 📞 अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: 7004702539 🌐 वेबसाइट: www.keshavjee.in #PostpartumDepression #MothersMentalHealth #PostnatalDepression #NewMomSupport #DrKeshavJee #BestPsychiatristInRanchi #NeuroPsychiatristNearMe #RanchiClinic #MentalHealthAwareness #BariyatuRanchi #WomensMentalHealth

#सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia): फिल्मों की कल्पना बनाम हकीकत अक्सर फिल्मों में सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति को हिंसक या खतरनाक दिखाया जाता है, लेकिन यह सच से कोसों दूर है। आइए इस मानसिक स्थिति से जुड़े भ्रम को दूर करें। मिथक बनाम सच: फिल्मों में: मरीज़ को हमेशा हिंसक या 'विलेन' की तरह दिखाया जाता है। हकीकत: सिज़ोफ्रेनिया के मरीज हिंसक नहीं होते, बल्कि वे खुद डरे हुए और भ्रमित होते हैं। वे अक्सर समाज से कट जाते हैं और खुद को नुकसान पहुँचाने के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। सिज़ोफ्रेनिया क्या है? यह एक गंभीर मानसिक स्थिति है जहाँ व्यक्ति के लिए हकीकत और भ्रम (#Hallucinations/Delusions) के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। वे ऐसी आवाज़ें सुन सकते हैं जो दूसरों को नहीं सुनाई देतीं। डॉ. केशव जी का संदेश: "सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्तियों को डर की नहीं, बल्कि हमारे साथ, सही इलाज और सहानुभूति की ज़रूरत है। समय पर इलाज से वे एक बेहतर जीवन जी सकते हैं।" #DrKeshavJee #NeuroPsychiatrist #SchizophreniaAwareness #MentalHealthFacts #StopTheStigma #RanchiMentalHealth #RealityVsMovies #BustingMyths #MentalHealthIndia #सिज़ोफ्रेनिया #मानसिकस्वास्थ्य #bestpsychiatristranchi

#DrKeshavJee​ #PsychiatryVsNeurology​ #RanchiMindAndBrainClinic​ नमस्ते! बहुत से लोग इस उलझन में रहते हैं कि उन्हें अपनी समस्या के लिए Psychiatrist (मनोरोग विशेषज्ञ) के पास जाना चाहिए या #Neurologist​ (नसों के डॉक्टर) के पास। आज के इस विशेष वीडियो में, रांची के सुप्रसिद्ध न्यूरो-साइकियाट्रिस्ट डॉ. केशव जी (MD Psychiatry) विस्तार से समझा रहे हैं कि इन दोनों क्षेत्रों में क्या बुनियादी अंतर है और आपको डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए। इस वीडियो में मुख्य चर्चा: Psychiatry v/s Neurology: नसों की बनावट और रसायनों के संतुलन का हमारे व्यवहार पर असर। डॉक्टर से कब मिलें? उन संकेतों को पहचानें जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सही विशेषज्ञ का चुनाव: आपकी समस्या के आधार पर सही मार्गदर्शन। डॉ. केशव जी के बारे में: डॉ. केशव जी रांची स्थित Ranchi Mind and Brain Clinic के संचालक हैं। वे डिप्रेशन, एंग्जायटी, नशा मुक्ति, मिर्गी और अन्य न्यूरो-साइकियाट्रिक समस्याओं के सटीक इलाज के लिए जाने जाते हैं। क्लीनिक का विवरण (Clinic Details): 📍 पता: 4th फ्लोर, अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची (झारखंड)। 📞 अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: +91-7004702539 / +91-9939009705 ⏰ समय: दोपहर 1:00​ बजे से शाम 6:00​ बजे तक (सोमवार से शनिवार)। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और हमारे चैनल को Subscribe करना न भूलें ताकि आप मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिस न करें। #DrKeshavJee​ #PsychiatryVsNeurology​ #MentalHealthAwareness​ #RanchiMindAndBrainClinic​ #BestPsychiatristRanchi​ #NeuroPsychiatry​ #HealthEducation​ Dr. Keshav Jee, Psychiatrist, Neuropsychiatrist, Neuro-psychiatrist, Psychiatrist in Ranchi, Best Psychiatrist in Ranchi, Neurology, Psychiatry, Dr. Rajnish Kumar

#OCD सिर्फ सफाई की बीमारी नहीं है – सच्चाई जानें अक्सर लोग सोचते हैं कि बार-बार हाथ धोना या चीजों को सजाकर रखना ही OCD (Obsessive-Compulsive Disorder) है। लेकिन यह इसका सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। OCD के पीछे की असलियत "Intrusive Thoughts" (अनचाहे विचार) हैं: मिथक: "मुझे सफाई पसंद है, इसलिए मुझे OCD है।" सच: OCD पसंद की बात नहीं है। यह अनचाहे और डरावने विचारों (Obsessions) से पैदा होने वाली भारी बेचैनी है, जिसे कम करने के लिए व्यक्ति बार-बार एक ही काम (Compulsions) करने पर मजबूर हो जाता है। OCD में और क्या हो सकता है? नुकसान होने का डर (जैसे- ताला लगा है या नहीं, गैस बंद है या नहीं)। मन में अनचाहे और हिंसक विचार आना। चीजों को एक खास क्रम में रखने की तीव्र मजबूरी। डॉ. केशव जी का संदेश: "OCD कोई मज़ाक नहीं, एक गंभीर मानसिक स्थिति है। सही उपचार (CBT और दवा) से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।" #DrKeshavJee #NeuroPsychiatrist #OCDAwareness #MentalHealthHindi #RanchiMindAndBrainClinic #OCDMyths #IntrusiveThoughts #MentalHealthMatters #RanchiDoctors #ओसीडी #मानसिकस्वास्थ्य

क्या यह सिर्फ बुढ़ापा है या कुछ और? 🧠 उम्र के साथ भूलने को नजरअंदाज न करें! अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया केवल याददाश्त की कमी नहीं हैं, बल्कि यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाली गंभीर स्थितियां हैं। जागरूकता अभियान के आठवें दिन (Day 8), डॉ. केशव जी साझा कर रहे हैं इसके कुछ शुरुआती लक्षण: मुख्य शुरुआती संकेत: हाल की घटनाओं को भूलना: अभी की गई बातों या जरूरी तारीखों को याद न रख पाना। परिचित कार्यों में कठिनाई: रोज़मर्रा के काम जैसे खाना बनाना या फोन चलाना भूल जाना। समय और स्थान का भ्रम: यह भूल जाना कि आप कहाँ हैं या वहाँ कैसे पहुँचे। बोलने या लिखने में समस्या: सही शब्द ढूँढने में संघर्ष करना या बातचीत के बीच में अटक जाना। निर्णय लेने में कमी: पैसों के प्रबंधन या साफ़-सफाई के प्रति लापरवाही बरतना। व्यवहार में बदलाव: अचानक चिड़चिड़ापन, उदासी या अकारण डर महसूस करना। डॉ. केशव जी का संदेश: "जल्द पहचान और सही न्यूरो-साइकियाट्रिक उपचार मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है। अगर आप अपने घर के बुजुर्गों में ऐसे बदलाव देखें, तो विशेषज्ञ की सलाह लें।" 📍 पता: 4th फ्लोर, अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची। 📞 संपर्क: 070047 02539

क्या आपका #स्मार्टफोन आपकी #शांति छीन रहा है? 📱 संयम ही समाधान है! लगातार नोटिफिकेशन्स और सोशल मीडिया की फीड हमें मानसिक रूप से थका सकती है। जागरूकता अभियान के इस विशेष भाग में, डॉ. केशव जी साझा कर रहे हैं #डिजिटल #डिटॉक्स के कुछ प्रभावी तरीके: डिजिटल डिटॉक्स के 5 सरल तरीके: #नोटिफिकेशन बंद करें: गैर-जरूरी ऐप्स के नोटिफिकेशन्स बंद रखें ताकि बार-बार ध्यान न भटके। #स्क्रीन-फ्री बेडरूम: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दें। #भोजन के समय नो फोन: खाना खाते समय मोबाइल को दूर रखें और स्वाद का आनंद लें। #प्रकृति से जुड़ें: दिन का कुछ समय बिना किसी गैजेट के खुली हवा या पार्क में बिताएं। #एक शौक पालें: खाली समय में स्क्रॉल करने के बजाय पढ़ें, लिखें या कोई पसंदीदा काम करें। डॉ. केशव जी का संदेश: "डिजिटल दुनिया से ब्रेक लेना आपके दिमाग को रिचार्ज करने के लिए जरूरी है। आज ही कुछ समय के लिए 'ऑफलाइन' होकर देखें!" 📍 पता: 4th फ्लोर, अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची। 📞 संपर्क: +917004702539

🌿 आज का दिन अपने '#मन' के नाम करें। पूरे हफ्ते की भागदौड़ के बाद, क्या आपने अपने मानसिक सुकून के लिए समय निकाला? #जागरूकता अभियान , डॉ. केशव जी साझा कर रहे हैं 5 आसान तरीके जिनसे आप मानसिक रूप से #तरोताजा महसूस कर सकते हैं। #मानसिक शांति के 5 मंत्र: #डिजिटलडिटॉक्स: आज कुछ घंटों के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं। प्रकृति के साथ समय: थोड़ी देर पार्क में टहलें या पौधों की देखभाल करें। गहरी सांस लें (#DeepBreathing): केवल 5-10 मिनट का प्राणायाम तनाव को कम कर सकता है। पसंदीदा शौक: वो काम करें जिससे आपको खुशी मिलती है—जैसे संगीत सुनना, पढ़ना या कुकिंग। पर्याप्त #नींद: शरीर और दिमाग की मरम्मत के लिए आज भरपूर और अच्छी नींद लें। डॉ. केशव जी का संदेश: "सेल्फ-केयर स्वार्थ नहीं है, यह एक जरूरत है। जब आपका मन शांत होगा, तभी आप जीवन की चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर पाएंगे।" 📍 पता: 4th फ्लोर, अजमेरा टावर, बरियातू रोड, रांची। 📞 संपर्क: +917004702539 #ranchimindandbrainclinic #mentalhealthawareness #डॉकेशवजी #नींदमेंबदलाव #ramnavami

राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई 🙏 . . . #ranchimindandbrainclinic #mentalhealthawareness #ramnavami #drkeshavjee

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